पापो की गठरिया Bhajan Lyrics

अमित कुमार सिट्ठा द्वारा गाया गया कृष्णा भजन पापो की गठरिया Bhajan Lyrics आपको प्रदान की जा रही है। सोनोटेक भक्ति ने ये कृष्णा भजन रिलीज़ किया है, और इस भजन के लेखक राम वल्लभ आचार्य है।

पापो की गठरिया Bhajan Lyrics

पापो की गठरिया
पापो की गठरिया क्यों फिरे लादे लादे
बोल राधे बोल राधे बोल राधे (×2)
राधे का नाम तूने मुख से लगाया
व्यर्थ के विवादों में जीवन गवाया (×2)
पाई जो उमरिया
पाई जो उमरिया
सस्ते में न गवा दे
बोल राधे बोल राधे बोल राधे (×2)
राधे के चरणों को तूने न ध्याया
राधे के चरणों को तूने न ध्याया
विषयो के ताप में ही मन को जलाया
भक्ति की चुनरिया मन को ओढ़ा दे
बोल राधे बोल राधे बोल राधे (×2)

राधे के द्वार तूने शीश न झुकाया
राधे के द्वार तूने शीश न झुकाया
मोह और माया ने चैन को चुराया
भोगो की अटरिया
भोगो की अटरिया
भक्ति में जला दी
बोल राधे बोल राधे बोल राधे (×2)
पापो की गठरिया
पापो की गठरिया क्यों फिरे लादे लादे
बोल राधे बोल राधे बोल राधे (×2)
राधे राधे राधे बरसाने वाले राधे
राधे राधे राधे बृषवान दुलारी राधे
राधे राधे राधे वृंदावन वाली राधे

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लेखक – राम बल्लभ आचार्य

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